दोस्तो, मेरा नाम सौरभ है. मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 26 साल है अभी 2 साल पहले ही मेरी शादी हुई है. मेरे लंड का साइज 7 इंच है ये मोटा और गोरा है.
मैं और मेरी वाइफ एक फ्लैट में रहते हैं. मेरी बीवी दीक्षा एकदम कमाल की है, उसकी चूत से मेरा लंड बहुत खुश है. लेकिन मेरे लंड को हर महीने एक नए छेद को चोदने का मन करता है, तो मैं कभी कभी होटल में किसी कॉलगर्ल को चोद लेता हूं. पर अब मेरी किस्मत खुलने वाली थी.
लगातार चुदाई के कारण मेरी वाइफ प्रेग्नेंट हो गई थी, तो अब मेरे लंड का काम नहीं चल रहा था. हम दोनों सेक्स के मज़े नहीं ले पा रहे थे.
चूंकि गर्भावस्था में भी मेरी बीवी को घर का काम करना पड़ता था, जिससे वो काफी थक जाती थी.
समीक्षा मेरी साली है, वो अभी कॉलेज में पढ़ती है. समीक्षा देखने में मस्त माल लगती है. उसके दूध बड़े बड़े और एकदम तने हुए हैं … मस्त फिगर है.
उसके एग्जाम हो चुके थे, तो मैंने अपनी ससुराल में फोन पर बात की और जाकर उसको अपने घर ले आया.
दोस्तो, जब मैं अपनी साली को लेने गया, तभी मैंने सोच लिया था कि अब दीक्षा की चूत की कमी मेरी ये साली पूरी करेगी.
समीक्षा मेरे साथ मेरे घर आ गई थी.
मगर मैंने किसी तरह से अपनी बीवी दीक्षा को मना लिया.
समीक्षा अपने कमरे में सोती थी, हम लोग अलग अपने कमरे में सोते थे. समीक्षा मुझसे बहुत मजाक करती थी. मैं भी उससे मजाक करता रहता था.
उसकी वो स्माइल मुझे अच्छी लगी. इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई.
वो एक गिलास में दूध लेकर आई और झुक कर मुझे गिलास पकड़ा दिया.
मैंने गिलास लेकर उसे आंख मार दी और दूध पीने लगा.
वो मेरे दूध पीने तक मेरे सामने ही बैठी रही. मैं भी दूध पीते हुए अपने होंठों पर जीभ फेर कर उसे देखते हुए बोला- हां बहुत गर्म दूध है, मजा आ गया.
वो हंस दी.
फिर शाम को समीक्षा अपने ब्वॉयफ्रेंड से चैट कर रही थी. मैंने उसका मोबाइल ले लिया और उन दोनों के बीच हुई चैट को पढ़ने लगा. मैंने देखा कि उसने अपने ब्वॉयफ्रेंड से एडल्ट बातें लिखी थीं.
अब वो मुझसे नजर नहीं मिला रही थी.
रात को जब वो खाना लगा रही थी, तो मैं उसके करीब हुआ और मजाक में उसके मम्मों पर हाथ फेर दिया.
उसने कुछ नहीं कहा. बस एक बार मुझे देखा और मुस्कुरा दी.
इससे वो हैरान हो गई और मैं और बिंदास हो गया.
फिर खाना खाने के बाद हम लोगों ने एक हॉरर मूवी देखी. समीक्षा को उस मूवी से बहुत डर लग रहा था.
वो डरने लगी और मूवी बंद करने के लिए कहने लगी. मगर मैंने न तो मूवी बंद की और न ही उसे जाने दिया.
मैंने यह प्लान जानबूझ कर बनाया था.
मैंने कहा- कोई बात नहीं है समीक्षा. तुम यहीं सो जाना. हम बगल में होकर सो जाएंगे.
करीब 11 बजे वो हमारे रूम के बाहर खड़ी होने दरवाजा खटखटाने लगी.
दीक्षा मुझे देख कर मुस्कुराने लगी.
मैं समीक्षा को अन्दर आने का कह कर बेड पर लेट गया. फिर समीक्षा हम दोनों के बीच में आकर लेट गई.
अब हम तीनों अलग अलग चादर में थे.
करीब आधे घंटे बाद उसने दीक्षा को आवाज देते हुए कहा- दीदी सुनो.
मगर दीक्षा सो चुकी थी, तो उसने जवाब नहीं दिया.
इतना बोल कर मैं चुप हो गया.
समीक्षा मेरे सेक्स करने की बात को सुनकर कुछ मूड में आने लगी. वो कुछ कहना चाहती थी. मगर फिर चुप हो गई.
मैंने सोचा कि आज की रात मौका अच्छा है, जैसा मैंने सोचा था, वैसा हो जाएगा.
दस मिनट बाद मैंने समीक्षा की तरफ करवट ले ली और उसके ऊपर हाथ रख दिया. वो सो चुकी थी, तो उसको कोई अहसास नहीं था.
मैंने थोड़ी हिम्मत करके आराम आराम से उसके मम्मों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया. दोस्तो वो जाग चुकी थी, लेकिन उसने मेरा विरोध नहीं किया.
मैं सोच में पड़ गया कि समीक्षा शायद सो रही है मगर जानबूझ कर कुछ कह नहीं रही है. चूंकि मेरी बीवी की तरफ से मुझे दिक्कत होने वाली नहीं थी, तो अब मेरी हिम्मत बढ़ गई. मैंने उसके मम्मों को दबाना चालू कर दिया.
बस फिर क्या था, वो चुप रही और उसने मुझे रोकना बंद कर दिया.
मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए. कमरे की लाइट तो पहले से ही ऑफ थी. नाईट बल्व में इतना उजाला नहीं था कि ने उसके नंगे बदन मैं निहार सकता.
कुछ ही देर में वो पूरी नंगी लेटी थी. मैंने उसको किस करना शुरू कर दिया और उसके मम्मों को सहलाने लगा.
थोड़ी देर बाद मैंने भी अपने पूरे कपड़े उतारे और अपनी साली समीक्षा की चूत पर अपने मुँह को रख दिया. उसकी चुत पानी छोड़ रही थी.
ये कह कर मैं 69 में हो गया और अपने लंड को उसके मुँह पर रख दिया.
पहले वो मेरे लंड को चूसने के लिए राजी नहीं हो रही थी. मगर मैंने जबरदस्ती उसके मुँह में लंड डाल दिया. उसको मेरे लंड को अपने मुँह में लेना ही पड़ा. हम दोनों इस पोजीशन में एक दूसरे के लंड चुत को चूसने लगे थे.
मैंने मस्ती से उसकी चूत चूसनी शुरू की. वो भी मजे ले लेकर मेरे लंड को चूसने लगी. मैं उसकी चूत पर अपनी पूरी जीभ को ऊपर से नीचे तक घुमा रहा था.
कुछ समय बाद हम दोनों ऐसी ही पोजीशन में झड़ गए.
वो एकदम से हांफने लगी थी. मैं भी मजे में था. फिर हम दोनों सीधे लेट गए. वो ढीली हो चुकी थी, लेकिन मैंने उसको गर्म किए रखा और उसको किस करता रहा.
ये सुनकर मैंने उसको दूसरी साइड आने का कहा और करवट लेकर लेटने को कहा.
मेरे कमरे में बेड पर एक तरफ मेरी बीवी दीक्षा सो रही थी. दूसरी तरफ मैंने अपनी साली समीक्षा को लिटाया हुआ था.
वो चुदने के लिए रेडी हो गई.
मैंने उसकी चूत पर अपना सांप की तरह फुंफकार मारता लंड रखा और अपनी साली की चुत की फांकों रगड़ने लगा.
वो पूरी गर्म हो चुकी थी. वो भी कहने लगी- आह जीजू क्यों तड़फा रहे हो, अब जल्दी से अन्दर डाल दो.
उसने अपने हाथ से लंड पकड़ा और चुत पर रख कर उसपर हाथ लगाए रही.
वो मस्त हुई, तो मैंने एक जोर से झटका दे दिया. उसकी चूत में मेरा लंड सरसराते हुए अन्दर चला गया. जैसे ही लंड अन्दर गया, उसने होंठ दूर करके चिल्ला दिया और रोने लगी. उसके आंसू बहने लगे.
रोने की वजह से से दीक्षा भी जाग गई थी, लेकिन वो सब मामला समझ रही थी इसलिए उठी ही नहीं और सोने का नाटक करती रही. मैं लंड घुसेड़ कर रुक गया.
दो पल बाद मैंने उसके मुँह पर हाथ रखते हुए फिर से लंड को धक्का दे दिया. वो छटपटाने लगी.
दीक्षा ने मेरे हाथ को पकड़ कर इशारा किया कि थोड़ा रुक जाओ … और आराम आराम से करो.
मैंने अब आराम आराम से लंड को अन्दर बाहर किया. कुछ देर की पीढ़ा के बाद समीक्षा का दर्द कम हो गया था. वो अब अपनी गांड हिलाते हुए मजेदार मूड में मेरा साथ देने लगी थी.
मैं उसकी मस्ती देख कर उसको धकापेल चोदने लगा.
फिर मैंने उसको बेड के नीचे खींचा और मैं नीचे बैठ गया. फिर अपनी साली मैंने समीक्षा को अपने ऊपर बिठा लिया.
वो मेरे लंड की सवारी करने की पोजीशन में आ गई थी. मैंने फिर से उसकी चूत में अपना लंड डाला और गांड उठाते हुए चुत में लंड के धक्के देने शुरू कर दिए.
मैंने उसे ज्ञान देना बंद किया और उसके दूध पकड़ कर चुत चुदाई की स्पीड एकदम से दुरंतो मेल के जैसे बढ़ा दी.
ताबड़तोड़ चुदाई होने लगी थी.
छह सात मिनट में ही वो झड़ने वाली हो गई थी. वो अपने चरम पर आई तो और तेज तेज गांड उछालने लगी. उसकी मादक आवाजें आने लगीं- आह जीजू अअअअ उईईई … और तेज पेलो अअ अअअ उईईई और तेज.
मैं समझ गया कि इसकी चुत जाने वाली है. मैंने भी अपनी रफ्तार बढ़ा दी.
वो एकदम से शिथिल होने लगी और मुझसे लिपट गई. समीक्षा ने मेरे लौड़े पर ही अपनी चुत का पानी छोड़ दिया था.
मैं अभी भी गर्म था. मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर अपनी रफ्तार में चोदने में लगा हुआ था. उसका पानी बह कर मेरे टट्टों पर आ गया था, लेकिन मैं अब रुकने वाला नहीं था.
उसने मुझे और कसके पकड़ लिया और मेरे बालों को खींचने लगी.
कुछ ही पलों बाद समीक्षा ढीली पड़ चुकी थी.
मैंने सोचा कि अभी रुक जाता हूँ. अभी इसको मज़ा नहीं आ रहा होगा. बेचारी थक चुकी है.
मैं लंड निकाल कर उठा और मैंने कपड़े से अपना लंड साफ किया. उसने भी अपनी चूत साफ की.
कुछ समय रुकने के बाद मैंने अपने लंड को उसके हाथों में दे दिया. मेरा लंड उसने अपने हाथों से सहला कर एकदम कड़क कर दिया.
वो कुछ नहीं बोली.
मैंने उसको फिर बेड पर डॉगी स्टाइल में किया और अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगा कर उसकी चूत में लंड को डालना शुरू किया.
मैंने दीक्षा को हिलाया और उठने का कहा. उसने मुझे और समीक्षा को नंगा देखा.
पहले तो समीक्षा शायद सोच रही थी कि उसे रोज रोज चुदना पड़ेगा … उसका क्या होगा. लेकिन जब दीदी ने कुछ नहीं कहा, तो उसकी हिम्मत बढ़ गई थी.
फिर दीक्षा ने उसने मुझे दवाई दे दी.
मैंने एक टेबलेट खाई और एक पेनकिलर टेबलेट समीक्षा को खिला दी.
मैंने उसको डॉगी की तरह किया और पीछे से अपने लंड को उसकी चूत के मुँह पर रख दिया. गोली खा लेने से अब मेरा लंड कड़क हो गया था और थोड़ा फूल चुका था.
दीक्षा ने मेरा हाथ पकड़ा तो मैंने आराम आराम से लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.
कुछ देर बाद मेरी साली का दर्द कम हो गया और वो भी मजे लेकर चुदने लगी. मैंने अपनी स्पीड तेज करते हुए उसको चोदना शुरू कर दिया.
पांच मिनट बाद मैंने समीक्षा को फिर से उसी पोजीशन में बने रहते हुए खड़ा किया और स्टेंडिंग डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू कर दिया.
मैंने उसके हाथ पीछे करके पकड़ रखे थे और तेज तेज चोद रहा था.
मेरी रफ्तार इतनी तेज थी कि उसके चूतड़ मेरी जांघों में टकरा कर पच पच कर रहे थे.
दवा के असर के कारण करीब एक घंटे तक चुदाई चलती रही. मैं मदहोशी में उसकी चुदाई करता रहा. वो तीन चार बार झड़ चुकी थी और एकदम से निढाल हो चुकी थी.
मुझ पर दवा का इतना ज्यादा असर था कि मैं झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था. मेरी ताकत अभी भी बनी हुई थी.
फिर मैंने उसको सीधा लिटाया और उसकी टांगों को अपने कंधों पर रखकर उसे चोदना शुरू किया. इस वक्त मेरे होंठ उसके होंठों पर थे और मेरे हाथ उसको मम्मों को मसल रहे थे. साथ ही मेरा मस्त लंड उसकी प्यारी सी चूत में लगातार आक्रमण किये जा रहा था.
वो रोने लगी थी- अअअह ऊऊउ मम्मीईई रे … जीजू तुम तो हैवान हो गए हो अअअअ … दीदी कैसे सहती हैं. ऊऊउ आप तो मुझे अह आज माररर ही डालोगे उईईई … बस करो अब. मुझमें हिम्मत ही नहीं बची है.
काफी देर बाद मेरे ऊपर से दवाइयों का असर खत्म हो चुका था और मैं झड़ने वाला हो गया था.
वो कुछ नहीं बोली.
सुबह करीब 10 बजे हम दोनों उठे, तो दीक्षा हम दोनों के लिए चाय लेकर आई. वो समीक्षा को थैंक्स कहके चली गई.
मैं उठा और तैयार होकर अपने ऑफिस के लिए निकल गया.
जब मैं ऑफिस से लौट कर 4 बजे वापिस आया, तो देखा समीक्षा बेड पर ही लेटी थी.
तो दोस्तो समीक्षा की इतनी हार्ड चुदाई पहली बार हुई थी. मैं समीक्षा को डॉक्टर के यहां लेकर गया. उसका ट्रीटमेंट करवा कर हम दोनों घर वापिस आए.
उस रात वो तड़पती रही. अगले दिन उसकी तबियत सही हो गई. तो मैंने चैन की सांस ली.
दोस्तो, जब तक मेरी पत्नी मुझसे चुदने के लिए सही कंडीशन में नहीं आ गई, तब तक समीक्षा ने मेरी सेक्स की जरूरत पूरी की.
मुझसे चुद चुद कर समीक्षा एकदम एक औरत की तरह लगने लगी थी. अब जब भी वो आती है, मैं अपनी बीबी और साली को एक साथ में ही चोदता हूँ.
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